डोनाल्ड ट्रंप की चुनाव जीत और उनकी रणनीतियां (2024)
2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप, जो रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैं, ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। यह उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी वापसी मानी जा रही है। ट्रंप ने मौजूदा उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को हराकर 312 इलेक्टोरल वोट्स के साथ जीत दर्ज की, जो 270 के न्यूनतम लक्ष्य से काफी अधिक है【55】【56】।
ट्रंप की जीत के मुख्य कारण:
- आर्थिक मुद्दे पर फोकस:
ट्रंप ने अमेरिकी मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत देने और महंगाई कम करने की बात पर जोर दिया। उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने वैश्विक व्यापार समझौतों और घरेलू उद्योग पर ध्यान केंद्रित किया। - रणनीतिक प्रचार:
ट्रंप ने जॉर्जिया और पेंसिल्वेनिया जैसे निर्णायक राज्यों में मजबूत अभियान चलाया। उनकी रैलियों में बड़ी संख्या में समर्थक जुटे, जिन्होंने उन्हें फिर से राष्ट्रपति बनाने का समर्थन दिया। - कमला हैरिस के प्रति मतभेद:
हैरिस की विदेश और आंतरिक नीतियों, विशेष रूप से चीन और रूस से निपटने के तरीकों पर, कई मतदाताओं ने असहमति जताई। यह ट्रंप के पक्ष में गया। - सोशल मीडिया और समर्थन:
ट्रंप ने सोशल मीडिया का कुशलतापूर्वक उपयोग किया और उनके कट्टर समर्थकों ने सक्रिय रूप से प्रचार किया।
चुनाव के परिणाम:

- डेमोक्रेटिक गढ़: कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में हैरिस ने जीत दर्ज की।
- स्विंग स्टेट्स: ट्रंप ने जॉर्जिया और उत्तरी कैरोलिना जैसे महत्वपूर्ण स्विंग स्टेट्स में जीत हासिल की।
ट्रंप की संभावित नीतियां:
- आर्थिक पुनर्निर्माण:
ट्रंप घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर देंगे। - विदेश नीति:
ट्रंप का फोकस चीन की बढ़ती ताकत को रोकने और रूस के साथ संबंध संतुलित रखने पर होगा। - आव्रजन:
उनकी आव्रजन नीति में सख्ती और दक्षिणी सीमा पर दीवार निर्माण को प्राथमिकता मिल सकती है।
चुनौतीपूर्ण स्थिति:
हालांकि ट्रंप ने चुनाव जीत लिया है, पर उनकी नीतियों और निर्णयों पर कई विवाद बने रहेंगे। कमला हैरिस की हार के बावजूद, उनकी विचारधारा को समर्थन करने वाले नागरिक अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं【55】【56】।
डोनाल्ड ट्रंप की जीत का भारत और वैश्विक संबंधों पर प्रभाव..

डोनाल्ड ट्रंप के पुनः राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और वैश्विक राजनीति में कई संभावित प्रभाव देखे जा सकते हैं। उनकी नीतियों का प्रभाव आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर व्यापक हो सकता है।
भारत पर प्रभाव:
- व्यापार और निवेश:
- ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भारत पर व्यापार शुल्क (टैरिफ) लगाने की बात की थी, लेकिन भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे।
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों में सुधार और अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ाने की संभावना है।
- ट्रंप की “मेक इन अमेरिका” नीति भारत के आईटी और फार्मा सेक्टर पर प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि भारत इन क्षेत्रों में अमेरिका को बड़ा निर्यात करता है mintHindustan Times।
- सामरिक संबंध:
- ट्रंप का फोकस चीन को काउंटर करना है, जो भारत के लिए सकारात्मक है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग (जैसे BECA और COMCASA समझौते) को और मजबूती मिल सकती है।
- क्वाड (QUAD) साझेदारी को ट्रंप सरकार और मजबूत कर सकती है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान, और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
- भारतीय समुदाय:
- ट्रंप की आव्रजन नीतियां भारतीय-अमेरिकन समुदाय को प्रभावित कर सकती हैं। एच-1बी वीज़ा जैसे मुद्दों पर सख्ती का सामना हो सकता है।
वैश्विक प्रभाव:

- चीन और रूस:
- ट्रंप का रुख चीन के प्रति आक्रामक रहेगा। यह वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है और एशिया में शक्ति संतुलन पर प्रभाव डालेगा।
- रूस के साथ ट्रंप का नरम रुख यूरोपीय संघ और नाटो देशों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
- मध्य-पूर्व:
- ट्रंप की नीति इस्राइल के समर्थन और ईरान के विरोध में रहेगी, जिससे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- भारत के लिए, यह तेल आयात और खाड़ी देशों में प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकता है।
- जलवायु परिवर्तन:
- ट्रंप के पिछले कार्यकाल में अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से अलग हो गया था। उनकी वापसी से वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- यूरोप और नाटो:
- ट्रंप का यूरोपीय संघ और नाटो पर दबाव उनकी फंडिंग और सुरक्षा नीतियों को प्रभावित कर सकता है।